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मिर्जापुर का इतिहास

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अधिकांश शहर ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा स्थापित किए गए थे, लेकिन प्रारंभिक विकास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी “लॉर्ड मार्कक्वेस वेलेस्ले” के सबसे प्रसिद्ध अधिकारी द्वारा स्थापित किया गया था। कुछ सबूतों के मुताबिक ब्रिटिश निर्माण की शुरूआत बरीर (बरिया) घाट से हुई थी। लॉर्ड वेलेस्ले ने बंगाल घाट को गंगा द्वारा मिर्जापुर में एक मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में पुनर्गठित किया है। मिर्जापुर में कुछ जगह लॉर्ड वेलेस्ले के नाम के अनुसार, वेलेस्लेगंज (मिर्जापुर में पहला बाजार), मुकेरी बाजार, तुलसी चौक इत्यादि के नाम के रूप में घोषित किया गया। नगर निगम की इमारत भी ब्रिटिश कंस्रक्शंस का एक अनमोल उदाहरण है। यह भारत में स्थित है जहां पवित्र नदी गंगा विंध्य रेंज से मिलती है। यह हिंदू पौराणिक कथाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है और वेदों में इसका उल्लेख है मिर्जापुर के पास एक धार्मिक स्थल विंध्याचल की स्थापना की विन्ध्याचल, शक्ति पीठ, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में तीर्थस्थान का केंद्र है। यहां स्थित विंध्यवासिनी देवी मंदिर एक प्रमुख आकर्षण है और देवी के आशीर्वादों का आह्वान करने के लिए चैत्र और...

मिर्जापुर का जन्म

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  पर्यटन की दृष्टि से मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश का काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण बरबस लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। मिर्ज़ापुर में स्थित विंध्याचल धाम भारत के प्रमुख हिन्दू धार्मिक स्थलों में से एक है। इसके अतिरिक्त सीताकुण्ड, लाल भैरव मंदिर, मोती तालाब, टांडा जलप्रपात, विल्डमफ़ाल झरना, तारकेश्‍वर महादेव, महा त्रिकोण, शिवपुर, चुनार किला, गुरूद्वारा गुरू दा बाघ और रामेश्‍वर, देवरहा बाबा आश्रम, अड़गड़ानंद आश्रम व अन्य छोटे बड़े जल प्रपातों आदि के लिए प्रसिद्ध है। मिर्ज़ापुर भदोही, वाराणसी, सोनभद्र, इलाहाबाद से घिरा हुआ है। भारत का अंतराष्ट्रीय मानक समय मिर्ज़ापुर जिले के अमरावती चौराहा स्थान से लिया गया है। मिर्ज़ापुर ग़ुलाबी पत्थरों (पिंकस्टोन) के लिये बहुत विख्यात है, प्राचीन समय में इस पत्थर का प्रयोग मौर्य वंश के राजा सम्राट् अशोक के द्वारा बौद्ध स्तुप एवं अशोक स्तम्भ (वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय चिन्ह) को बनाने में किया गया था। मिर्ज़ापुर के लोगों की मूल भाषा मिर्ज़ापुरी है तथा हिन्दी एवं भोजपुरी भी चलन में है। मिर्ज़ापुर में...